UAE में फर्जी वीडियो शेयर करना पड़ा भारी, 19 भारतीयों समेत 35 लोग गिरफ्तार, जंग के बीच सोशल मीडिया पोस्ट बने मुसीबत

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात में सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री साझा करना कई लोगों के लिए भारी पड़ गया है। हाल ही में 19 भारतीय नागरिकों समेत कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए जो जंग से जुड़े भ्रामक और मनगढ़ंत बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान के बाद क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

15 मार्च को जारी हुआ गिरफ्तारी का आदेश

संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमाद सैफ अल शम्सी ने 15 मार्च 2026 को इन गिरफ्तारियों के आदेश जारी किए। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई वीडियो क्लिप्स साझा किए गए, जो वास्तविक नहीं थे और कुछ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया था।

ईरानी हमलों से जुड़े फर्जी वीडियो किए गए पोस्ट

जांच एजेंसियों के अनुसार सोशल मीडिया पर जिन वीडियो और क्लिप्स को साझा किया गया, उनमें मिसाइल हमले, विस्फोट और जंग से जुड़ी घटनाओं के दृश्य दिखाए गए थे। हालांकि इनमें से कई वीडियो एडिटेड या पूरी तरह से मनगढ़ंत पाए गए। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कंटेंट का मकसद लोगों में डर और अफवाह फैलाना तथा क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करना हो सकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के बाद हुई कार्रवाई

अमीरात न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ाने के बाद यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार लोगों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। पहले समूह में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने बिना सत्यापन के वीडियो क्लिप्स साझा किए। दूसरे और तीसरे समूह में ऐसे लोग बताए गए हैं जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए फर्जी वीडियो पोस्ट किए या हमलों से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा दिया। कुल 35 आरोपियों में 19 भारतीय नागरिक शामिल हैं और इनके खिलाफ फास्ट-ट्रैक ट्रायल चलाया जाएगा। दोषी पाए जाने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

संयुक्त अरब अमीरात में साइबर कानून बेहद सख्त

संयुक्त अरब अमीरात में साइबर क्राइम से जुड़े कानून काफी कड़े माने जाते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या देश की स्थिरता को प्रभावित करने वाली कोई भी ऑनलाइन सामग्री साझा करना अपराध की श्रेणी में आता है। खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में सैन्य तनाव जारी हो, तब बिना पुष्टि वाले वीडियो या खबरें साझा करना गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

सरकार ने जारी की सख्त चेतावनी

संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने लोगों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का अपुष्ट या भ्रामक कंटेंट साझा न करें। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी पोस्ट से समाज में घबराहट फैल सकती है और देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

UAE में रहने वाले भारतीयों के लिए अहम सलाह

अधिकारियों ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों सहित सभी लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें। जंग, हमले या किसी संवेदनशील घटना से जुड़े वीडियो और खबरें बिना पुष्टि के साझा न करें। हमेशा आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए या एडिटेड वीडियो से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। ऐसे वीडियो बनाना और फैलाना आज बेहद आसान हो गया है, लेकिन इन्हें साझा करने से गंभीर कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं। राजनीतिक या सैन्य मामलों पर टिप्पणी करते समय भी सावधानी बरतने को कहा गया है।

भारतीय दूतावास ने भी दी सतर्क रहने की सलाह

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूतावास ने कहा है कि किसी भी तरह की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। संयुक्त अरब अमीरात में लाखों भारतीय काम करते हैं, ऐसे में मौजूदा हालात में जिम्मेदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना बेहद जरूरी बताया गया है।


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